चर्खा, खादी और बापू इन तीनों को एक दूसरे से अलग करके नही देखा जा सकता। लेकिन अब इस फॉर्मूले में क्या बापू आउट और मोदी इन हो गए है। खादी विलेज इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन यानी केवीआईसी के इस साल के कैलेंडर और डायरी पर गांधी जी के बजाय मोदी जी चर्खा चलाते दिखे। इसका तुरंत विरोध शुरू हो गया इस आरोप के साथ कि मोदी गांधी जी की जगह लेने की कोशिश कर रहे है। जवाब में बीजेपी ने कहा है कि खादी को बढ़ावा देने के लिए जो प्रधानमंत्री मोदी ने किया है वो कभी पहले हुआ नहीं हुआ।
खादी ग्राम्य उद्योग आयोग यानी केवीआईसी के कैलेंडर को लेकर विवाद हो गया है। इस बार के कैलेंडर और डायरी पर पीएम मोदी की चर्खा चलाते हुए तस्वीर छपी है। पिछली बार कैलेंडर पर महात्मा गांधी की तस्वीर छपी है। संस्था ने कहा है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि सिर्फ गांधी की तस्वीर ही छापी जा सकती है। पहले भी बिना गांधी की तस्वीर के खादी इंडिया का कैलेंडर छपता रहा है। पीएम मोदी इस वक्त खादी के सबसे बड़े ब्रांड अंबेसडर हैं, इसलिए उनकी तस्वीर छापी गई है।
उधर मोदी की तस्वीर छपने पर केवीआईसी के कर्मचारियों ने भी काली पट्टी बांध कर विरोध किया है। कांग्रेस ने गांधी की जगह मोदी की तस्वीर छापने को पाप बताया है।
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चर्खा, खादी और बापू इन तीनों को एक दूसरे से अलग करके नही देखा जा सकता। लेकिन अब इस फॉर्मूले में क्या बापू आउट और मोदी इन हो गए है। खादी विलेज इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन यानी केवीआईसी के इस साल के कैलेंडर और डायरी पर गांधी जी के बजाय मोदी जी चर्खा चलाते दिखे। इसका तुरंत विरोध शुरू हो गया इस आरोप के साथ कि मोदी गांधी जी की जगह लेने की कोशिश कर रहे है। जवाब में बीजेपी ने कहा है कि खादी को बढ़ावा देने के लिए जो प्रधानमंत्री मोदी ने किया है वो कभी पहले हुआ नहीं हुआ।
उधर मोदी की तस्वीर छपने पर केवीआईसी के कर्मचारियों ने भी काली पट्टी बांध कर विरोध किया है। कांग्रेस ने गांधी की जगह मोदी की तस्वीर छापने को पाप बताया है।
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